
panchayat sachiv mp भोपाल। मध्य प्रदेश के पंचायतकर्मियों और ग्राम पंचायत सचिवों के वेतनमान निर्धारण, एरियर भुगतान और पुरानी सेवाओं की अवधि जोड़ने के वर्षों पुराने विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। मध्य प्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मंत्रालय ने प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), जिला पंचायत को एक बेहद कड़ा ‘अति-महत्वपूर्ण/तत्काल’ पत्र (क्रमांक/प.वि./2026/983) जारी किया है।
इस आदेश के जरिए शासन ने जिला स्तर के अधिकारियों को चेताया है कि वे माननीय उच्च न्यायालय (जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ) द्वारा हाल ही में पंचायत सचिवों के पक्ष में पारित किए गए आदेशों के खिलाफ तत्काल पुनरीक्षण याचिका (Review Petition) दायर करें, ताकि सरकार के ऊपर किसी भी प्रकार की अवमानना (Contempt of Court) की स्थिति निर्मित न हो।
क्या है पूरा मामला और क्यों उपजा कानूनी विवाद?panchayat sachiv mp
यह पूरा मामला साल 1995 की ‘पंचायतकर्मी योजना’ के तहत नियुक्त कर्मचारियों और बाद में बनाए गए पंचायत सचिवों के वेतनमान और एरियर से जुड़ा है:
- पुरानी सेवाओं की गणना का विवाद: पंचायत सचिवों की मांग रही है कि उनकी पंचायतकर्मी/पंचायत सचिव के रूप में की गई पुरानी सेवाओं को कुल सेवा अवधि में जोड़ा जाए। माननीय हाईकोर्ट ने अजय शर्मा विरुद्ध म.प्र. शासन (WP No. 14188/2017) व अन्य 06 समविषयक याचिकाओं में 10.01.2024 को एक एकीकृत आदेश पारित किया था। कोर्ट ने माना था कि शासन द्वारा पुरानी सेवाओं की गणना को केवल 01.04.2008 से किया जाना त्रुटिपूर्ण (Erroneous) है और सचिवों को भूतलाक्षी प्रभाव से 01.04.2008 और 24.07.2013 से एरियर भुगतान करने के निर्देश दिए थे।
- शासन ने लिया ‘स्टे’ (Stay Order): हाईकोर्ट के इस फैसले के विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन ने रिट अपील (WA No. 112/2025) प्रस्तुत की थी। माननीय उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए 01.05.2025 को इस आदेश पर स्थगन (Stay) प्रदान कर दिया था।
नई रिट याचिकाओं और कोर्ट के आदेशों पर सरकार की चिंता
panchayat sachiv mp विभाग ने अपने नए आदेश में इस बात पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई है कि 01.05.2025 से शासन के पक्ष में स्थगन आदेश (Stay) निरंतर प्रभावशील होने के बावजूद, वर्तमान में इस तथ्य को संज्ञान में लिए बिना हाईकोर्ट की विभिन्न खंडपीठों द्वारा कई नई रिट याचिकाओं (जैसे WP No. 22343/2026, 18732/2026, 18535/2026 आदि) में लगातार पंचायत सचिवों के पक्ष में समान लाभ देने या अभ्यावेदनों के निराकरण के आदेश पारित किए जा रहे हैं।
इसके कारण मैदानी अधिकारियों के सामने समय-सीमा समाप्त होने पर कोर्ट की अवमानना (Contempt) झेलने का बड़ा खतरा पैदा हो रहा है।
जिला स्तर के अधिकारियों को विभाग के कड़े निर्देश
उप सचिव हृदयेश कुमार श्रीवास्तव द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित आदेश में स्पष्ट तौर पर निर्देशित किया गया है कि:panchayat sachiv mp
- तत्काल रिव्यू पिटीशन लगाएं: जिन जिलों में पंचायत सचिवों द्वारा वेतन निर्धारण या एरियर प्रदान करने के संबंध में रिट याचिकाएं लगाई गई हैं, वहां पूर्व में शासन के पक्ष में जारी स्थगन आदेश (दिनांक 01.05.2025) के आधार पर तत्काल पुनरीक्षण याचिका (Review Petition) प्रस्तुत की जाए।
- अभ्यावेदनों का निराकरण: माननीय न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में याचिकाकर्ताओं से प्राप्त अभ्यावेदनों (Representations) का त्वरित निराकरण शासन के नियमों के तहत किया जाए।
- शिथिलता बर्दाश्त नहीं: शासन ने सख्त लहजे में कहा है कि इस कानूनी कार्यवाही को करने में जिला स्तर से किसी भी प्रकार की शिथिलता या ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए।






