
smart meter to ravet विद्युत वितरण कंपनी ने 3 सितंबर को जारी स्मार्ट मीटर परियोजना से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। तकनीकी जांच में स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से सही पाए गए है। अगस्त 2026 में बैतूल एवं मुलताई नगर जोन में उपभोक्ताओं को 15.91 लाख का टाइम-ऑफ-डे रिबेट प्राप्त हुआ।
गुणवत्ता जांच में तकनीकी रूप से सटीक पाए गए स्मार्ट मीटर
मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड बैतूल व्रत के महाप्रबंधक ने बताया कि स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली को लेकर उपभोक्ताओं में विश्वास बनाए रखने के लिए चेक मीटर के माध्यम से गहन भौतिक सत्यापन किया गया। कुल 29824 स्मार्ट मीटरों के निरीक्षण चक्र में बैतूल शहरजोन एक व दो एवं मुलताई नगरजोन में 428 स्मार्ट मीटरों वाले उपभोक्ताओं के परिसर में चेक मीटर लगाकर समानांतर परीक्षण किया गया। smart meter to ravet जांच के दौरान सभी 428 मीटर पूरी तरह सही पाए गए और निर्धारित मानकों के अनुरूप तकनीकी रूप से सटीक दर्ज हुए। इस परीक्षण से यह साबित होता है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह सटीक हैं और उपभोक्ता द्वारा खपत की गई बिजली का ही सटीक बिल बनाते हैं। सटीक बिलिंग के साथ-साथ स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को टाइम-ऑफ-डे टैरिफ योजना का लाभ उठाकर बिजली बिल कम करने में भी मदद कर रहे हैं। सोलर या ऑफ-पीक कम मांग वाले घंटों के दौरान बिजली का उपयोग करके उपभोक्ताओं ने अगस्त 2026 के महीने में कुल 15.91 लाख का सीधा बिल रिबेट छूट प्राप्त किया है।
उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर के प्रमुख लाभ
smart meter to ravet सटीक रीडिंग अर्थात डिजिटल तकनीक से मानवीय भूल या अनुमानित बिलिंग की संभावना समाप्त हो जाती है। रियल-टाइम ट्रैकिंग अर्थात उपभोक्ता अपने मोबाइल ऐप/पोर्टल के माध्यम से घंटे-दर-घंटे की खपत देख सकते हैं। ऑफ-पीक आवर्स में बिजली का उपयोग करने पर स्वचालित रूप से कम दरें और रिबेट लागू होते हैं।
smart meter to ravet कंपनी ने सभी बिजली उपभोक्ताओं से अपील करती है कि वे अपने स्मार्ट मीटर ऐप/पोर्टल के जरिए अपनी खपत पर नजर रखें और रिबेट वाले घंटों में बिजली का इस्तेमाल कर अपने मासिक बिल में अधिक से अधिक बचत करें।
स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है? (मुख्य चरण) smart meter to ravet
- बिजली की माप (मेजरमेंट): स्मार्ट मीटर के अंदर लगे सेंसर्स और डिजिटल चिप वोल्टेज (वोल्टेज डिवाइडर के जरिए) और करंट (शंट या करंट ट्रांसफार्मर के जरिए) को लगातार मापते हैं।
- पावर की गणना: मीटरिंग चिप इन दोनों सिग्नल्स को गुना करके यह हिसाब लगाती है कि कितनी पावर खर्च हो रही है (किलोवाट-घंटे या यूनिट्स में)।
- डेटा भेजना (कम्युनिकेशन): स्मार्ट मीटर में एक सिम कार्ड या मॉडेम लगा होता है, जो मोबाइल नेटवर्क (4G/2G) या वायरलेस तकनीक के जरिए हर कुछ मिनटों या घंटों में खपत का एन्क्रिप्टेड डेटा बिजली बोर्ड के सर्वर को भेजता है।
- ऑटोमैटिक बिलिंग और प्रीपेड सुविधा: इसके जरिए हर महीने सटीक ऑनलाइन बिल बन जाता है। प्रीपेड मोड में होने पर बैलेंस खत्म होते ही यह रिमोटली सप्लाई बंद कर सकता है और रिचार्ज करने पर दोबारा चालू कर देता है।
खामियां प्रमुख कारण और आपत्तियां smart meter to ravet
- प्रीपेड व्यवस्था का डर: कई स्मार्ट मीटर प्रीपेड मोड में आते हैं, जिससे मोबाइल की तरह पहले रिचार्ज कराना पड़ता है। रिचार्ज खत्म होने पर बिजली अपने आप कटने की चिंता रहती है।
- बढ़े हुए बिल का संदेह: उपभोक्ताओं में यह भ्रम और शिकायत रहती है कि स्मार्ट मीटर तेज चलते हैं और पुराने मीटर की तुलना में अधिक बिजली बिल आता है।
- जबरदस्ती या बिना सहमति बदलाव: कई क्षेत्रों में बिना उपभोक्ताओं की सहमति के पुराने मीटर बदलकर स्मार्ट मीटर लगाने पर नाराजगी और विरोध देखने को मिला है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह वैकल्पिक है और जबरदस्ती नहीं की जानी चाहिए।
- तकनीकी और डेटा संबंधी चिंताएं: इंटरनेट या नेटवर्क पर निर्भरता, सर्वर डाउन होने पर असुविधा और डेटा प्राइवेसी को लेकर भी लोग संकोच करते हैं।




