
ब्यूरो रिपोर्ट
सारनी – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह शताब्दी वर्ष है। देश में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मध्य भारत प्रांत में भी पथ संचलन , हिन्दू सम्मेलन , प्रमुख जन गोष्ठी जैसे अनेक कार्यक्रम हो रहे हैं। इसी श्रृखंला में संघ के कार्य की दृष्टी से मुलताई जिले के सारनी नगर में प्रमुख जन गोष्टी आयोजित की गई। जिसमें समाज के 22 श्रेणीयों के प्रमुख जन उपस्थित हुए। इस अवसर पर भारत माता का पूजन और दीप मुख्य अतिथी हेमंत सेठिया ने प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। श्री सेठिया ने उपस्थित प्रमुख जनों को संबोधित करते हुए बताया कि भारत में हजार वर्षों तक संघर्ष का काल रहा। मुगलों के साथ साथ शक, हूण,कुशाण और फिर अंग्रेजों से संघर्ष रहे। कारण स्पष्ट था, हम असंगठित थे। हिन्दू समाज संगठित नही था। देश को स्वतंत्र कराने का प्रयास सभी ओर से हो रहा था। कांग्रेस की स्थापना हुई जो एक अंग्रेज ने की थी। ऐसे में देश आजाद हो जायेगा।लेकिन देश की स्वतंत्रता अक्षुण्ण रह पायेगी,इसमें संदेह था। इतिहास का सिंहावलोकन करने पर केशव बलिराम हेडगेवार ने एक ऐसे संगठन की स्थापना की जो आज देश ही नही वरन विश्व का एक मात्र स्वयंसेवी संगठन है। संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 विजयादशमी के दिन नागपुर में हुई। आज यह संगठन हिन्दू समाज को संगठित कर इस राष्ट्र को विश्व गुरू के शिखर पर स्थापित करने के लिए हजारों स्वयंसेवक निःस्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं। 1934 में वर्धा महाराष्ट्र के एक शिवीर में महात्मा गांधी गये। गांधी जी ने कौन कौन से जाति के लोग हैं पूछा। उत्तर में हम सब भारत माता के पुत्र हैं। संघ में छोटा बडा कोई जाति नही चलती है। समरसता ही आधार है। संघ शताब्दी में पचं परिवर्तन के माध्यम से समाज को जागृत कर संगठित करने का कार्य कर रहा है। संघ के स्वयंसेवकों ने सरकार की प्रताड़ना भी झेली है। संघ सदैव राष्ट्र को सर्वोपरि स्थान पर रखता है। हम सभी संघ कार्य में सक्रिय रूप से योगदान दे जिससे भारत विश्व का नेतृत्व कर सके।अंत में वंदे मातरम गीत से कार्यक्रम का समापन हुआ।